सुबह की महक मेरे तन-मन को महकाए
इस महक में बीती हुई शाम याद आए
मह में डूब मुकम्मल हुआ जहान
दो प्यालों भरी ज़िंदगी लगने मह लगी
आनंद में विभोर प्रसन्नचित हो उठा ये मन
याद बीते पलों में सब आने लगे
चाहत हुई बन प्याला
भर दूं रंग खुशियों के
यकीन है खुशियों भरे हो जाएँगे जीवन सबके
खुशी जिनको याद कर ये विचार इस मह-दीवान के अंतर्मन में आया है!
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