Saturday, May 7, 2011

प्राकृतिक धरोहर है शांति


प्राकृतिक धरोहर है शांति
चाहत में जिसकी भटका फिरे ये मानव
ना जाने खोया संसार में हो अलबेला
ठहरी आज मानव पद नीचे

याद कर दशा मानव की
कहे जिया, आ एक बार गाँव में,
करेगा एहसास शांतिक अंशों का

धरोहर हैं हमारी और शांति-दयता गाँव
बदलने जिनको तू चला ए मानव

स्थिर सहलाते पौधे
प्रेम में अपने करते वायु-आलिंगन
लगते जीव जन्तु प्रकृति में आज निराले
होता अनुभव शांत मन का
और परिकल्पित होता 'शांति पुरुष'
प्राकृतिक धरोहर है शांति