Saturday, December 18, 2010

आज फिर तुम याद आए

महका समा थम सा गया
हर महक में ना जाने क्यों में बहक सा गया

एतबार था उस सौंधी खुश्बू का
शायद इसलिए हर बार तुम याद आए

रवानगी में दीवानगी है
महसूस होगा महक में खो जाओंगा 

सदियों का सफ़र तय जो किया
उस सफ़र को तुम आज फिर याद आए

मंज़िल थे मेरी तुम और में रास्ता
खो गया जो मुसाफिर 'मुझे' आज फिर तुम याद आए!

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