Mystic's Meal
Wednesday, January 9, 2013
पड़ाव
हर पड़ाव पे आकर
तय किया सफ़र देखकर
पथिक के मन में विभिन ख़याल आते हैं
जो कहूँ जीता है सफ़र पथिक दो बार हर सफ़र
तो ग़लत होगा,
कुछ सफ़र जीए हैं हमने हज़ार बार!
(for the moment....!)
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