Monday, March 28, 2011

बयाँ करने को तुझसे ये जी चाहता है


ए राहगीर ना बदल बाट
बयाँ करने को आज तुझसे ये जी चाहता है

मासूम है तू कोमल है मन तेरा
बयाँ करने को तुझसे आज ये जी चाहता है

ठहर वक़्त को दे थोड़ा वक़्त
होगा एहसास तुझे भी

बाट बन जाती है मंज़िलें मिल जाती हैं
देखे जो सपने रख विश्वास उनपर
तुझसे ये बयाँ करने को आज जी चाहता है

मुकाम जो हासिल किया है आज
कदमों की तेरे वो दस्तक है मंज़िल को
आज तुझसे ये बयाँ करने को जी चाहता है

होगा जहाँ में इक दिन परचम तेरा
तुझसे आज ये बताने को जी चाहता है!



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